शिक्षा

| विभाग का नाम | ई-मेल | पता | मोबाइल नंबर |
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| जिला शिक्षा अधीक्षक का कार्यालय | mdmbokaro[at]gmail[dot]com | जिला शिक्षा अधीक्षक का कार्यालय कैंपस मिडिल स्कूल एसबीएस चास, वैभव होटल के पीछे, बोकारो |
06542359968 |
संक्षिप्त विवरण के साथ महत्वपूर्ण योजनाएं
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- मिड डे मील स्कीम:-
केन्द्र प्रायोजित मध्याह्न भोजन के तहत सरकारी/मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक/मदरसा विद्यालयों में वर्ग 01 से 08 तक के नामांकित बच्चों को अल्पाहार एवं दोपहर का पका भोजन उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही सप्ताह में तीन दिन पूरक पोषाहार के रुप में अंडा/फल भी दिया जाता है। मध्याह्न भोजन योजना के प्रांरभ होने से विद्यालयों में ब्च्चों का छीजन दर घटा है तथा इससे बच्चों को कुपोषण से भी बचाव होता है। साथ ही यह सामाजिक मूल्यों एवं बच्चों के बीच समानता के मूल्यों को भी स्थापित करने में कारगर साबित हुआ है। इस कार्यक्रम में सभी वर्ग के बच्चें एक साथ बैठते है तथा एक प्रकार का भोजन करते है। यह योजना लिंग भेद को भी समाप्त करने में कारगर रहा है, क्योंकि इस योजना में बालक एवं बालिकाओं को समान रुप से भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।
पात्रताः- मध्याह्न भोजन योजना का लाभ सरकारी/मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक/मदरसा विद्यालयों में नामांकित एवं विद्यालयों में उपस्थित वर्ग 01 से 08 तक के सभी बच्चों को अल्पाहार एवं दोपहर का पका भोजन दिया जाता है।
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- स्कूल किट:-
सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 01 से 08 तक के बच्चों को निःशुल्क विद्यालय किट योजनान्तर्गत सहायक शिक्षण सामग्री के रुप (नोट बुक, पेंन/पेंसिल,रबर, कटर, बॉक्स, स्कूल बैग तथा जूता एवं मौजा) उपलब्ध कराने हेतु वर्ग 01 से 05 के बच्चों के लिए 590 रु0 एवं वर्ग 06 से 08 के बच्चों के लिए 715 रु0 दिया जाता है।
पात्रताः- निःशुल्क विद्यालय किट योजना का लाभ उन्हीं बच्चों को दिया जाता है, जिनकी विद्यालय में औसत उपस्थिति न्यूनतम 50 प्रतिशत होती है।
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- मुख्यमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना:-
सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 06 के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्राओ को उनके बैंक खाते में 2000.00 रु0 का सावधि के रुप राशि जमा की जाती है। यह राशि बालिका द्वारा कक्षा 08 की पढाई पूरा कर कक्षा 09 में नामांकन के उपरांत निकाला जा सकेगा। खाताधारक बालिका द्वारा योजना की शर्त पूरी नहीं करने की स्थिति में वे राशि के हकदार नहीं होगी और इस राशी को संबंधित कोषागार में जमा कर दिया जायेगा।
पात्रताः- सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 06 के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्राओं का निकट के राष्ट्रीयकृत/ग्रामीण बैंक में बचत खाता खोलवाकर उनके खाते पर 2000.00 रु0 की राशि हस्तानान्तरित करते हुए सावधि जमा पत्र के रुप में की जाती है।
शिक्षा का अधिकार
मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम या शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 4 अगस्त 2009 को अधिनियमित भारत की संसद का एक अधिनियम है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत भारत में 6 से 14 वर्ष के बीच के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के महत्व के तौर-तरीकों का वर्णन करता है। 1 अप्रैल 2010 को अधिनियम लागू होने पर भारत हर बच्चे के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने वाले 135 देशों में से एक बन गया। अधिनियम शिक्षा को 6 से 14 वर्ष के बीच के प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार बनाता है और प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम मानदंडों को निर्दिष्ट करता है। इसमें सभी निजी स्कूलों को बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करने की आवश्यकता है (सार्वजनिक-निजी भागीदारी योजना के हिस्से के रूप में राज्य द्वारा प्रतिपूर्ति की जाएगी) आर्थिक स्थिति या जाति आधारित आरक्षण के आधार पर बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिया जाता है | यह सभी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को अभ्यास करने से भी प्रतिबंधित करता है, और प्रवेश के लिए कोई दान या कैपिटेशन फीस और बच्चे या माता-पिता का कोई साक्षात्कार नहीं करने का प्रावधान करता है। यह अधिनियम स्कूल छोड़ने वालों को समान उम्र के छात्रों के बराबर लाने के लिए विशेष प्रशिक्षण का भी प्रावधान करता है। आरटीई अधिनियम के लिए ऐसे सर्वेक्षणों की आवश्यकता है जो सभी मोहल्लों की निगरानी करेंगे, शिक्षा की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करेंगे और इसे प्रदान करने के लिए सुविधाएं स्थापित करेंगे। 18 वर्ष की आयु तक विकलांग व्यक्तियों की शिक्षा का अधिकार एक अलग कानून – विकलांग व्यक्ति अधिनियम के तहत निर्धारित किया गया है। शिक्षा किसी भी सभ्य समाज की रीढ़ होती है।